चीन में पहली बार शहरों में रह रहे लोगों की संख्या गांवों में रहने वालों से ज्यादा हो गई है. आंकड़ों के मुताबिक करीब 67.5 करोड़ लोग शहरों में रहते हैं. यह चीन की कुल आबादी का 51 प्रतिशत है.
शहरों में बदलता चीन
मेगासिटीज
दुनिया के हर छह शहरों में से एक बड़ा शहर चीन में स्थित है. शंघाई और बीजिंग दुनिया के सबसे बड़े महानगरों में गिने जाते हैं.
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भीड़ भाड़
आर्थिक स्थिरता के लिए चीन की सरकार शहरों को बढ़ावा दे रही है. ग्रामीण इलाकों में विकास करने की जगह सरकार के लिए भी शहरों में आधारभूत सुविधाएं मुहैया कराना ज्यादा आसान है.
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सैटेलाइट शहर
दक्षिणी गुआंगजू शहर में शहर के बाहर भी ऊंची इमारतें बनाई जा रही हैं. सरकार निर्माण के काम के साथ शहरों में लोगों की भीड़ के लिए तैयारियां कर रही है.
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हर तरफ निर्माण
चीन के लगभग हर शहर में निर्माण का काम होता दिखता है. देश में 25 करोड़ मजदूर नौकरियों की तलाश में गांवों से शहरों का रुख कर रहे हैं.
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दूसरा पहलू
गांव से आने वाले अधिकतर लोग ऐसी ही तंग गलियों में रहते हैं. भारत में भी हालत कुछ ऐसे ही हैं.
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धुआं होते शहर
हर शहर में शंघाई की चकाचौंध और बीजिंग के शौपिंग मॉल नहीं दिखते, बल्कि कारखानों से उठता हुआ जहरीला धुंआ इनकी पहचान है. अधिकतर शहरों में लोगों को इस धुंए के साथ ही जीना होता है.
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एक और सच्चाई
जहां एक तरफ शहरों का विकास हो रहा है, वहीं ऐसे दृश्य भी आम हैं. घरों और कारखानों का कूड़ा चीन में भी पर्यावरण के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं.
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भविष्य
चीन का शहरीकरण जारी रहेगा. माना जा रहा है कि 2020 तक चीन की 60 प्रतिशत आबादी शहरों में रहने लगेगी.